pahli holi sasural mein kyon nahin manae jaati इसके उपर बात करेंगे आज हम । दोस्तों दुनिया भर के अंदर कई सारी मान्यताएं होती हैं। अपने यहां पर एक मान्यता तो यह भी है कि शादी होने के बाद किसी भी महिला को पहली होली ससुराल के अंदर नहीं मनानी चाहिए । यह अशुभ माना जाता है। हालांकि बहुत से लोग यह पूछ सकते हैं , कि इसको अशुभ क्यों माना जाता है ? तो आइए जानते हैं , इसके उपर अलग अलग तरह की मान्यताओं के बारे मे ।
pehli holi sasural mein kyon nahin manana chahie सास बहू के रिश्ते मे समस्याएं आती हैं ।
दोस्तो ऐसा माना जाता है कि पहली होली का दहन के समय यदि बहू ससुराल के अंदर रहती है। तो इसकी वजह से सास और बहू के रिश्ते के अंदर समस्याएं आ सकती हैं। मतलब लड़ाई झगड़ा हो सकता है , इसलिए बेहतर होगा कि अपनी बहू को मायेके भेज दें । यह पहला कारण है।
दूसरी बात घर मे सुख शांति आती है।
ऐसा माना जाता है कि पहली होली यदि बहू मायके के अंदर मानती है। तो इसकी वजह से आपके घर के अंदर सुख शांति बनी रहती है। मतलब घर मे सुखी होने के चांस अधिक हो जाते हैं। और पति पत्नी आगे भी अपने जीवन को सुख पूर्वक व्यतीत करते हैं।
तीसरी बात वैवाहिक जीवन अच्छा रहता है।

ऐसा माना जाता है कि यदि दुल्हन पहली होली को मायके के अंदर मानती है। तो इसकी वजह से वैवाहिक जीवन काफी अच्छा जाता है। मतलब यह है कि वैवाहिक जीवन के अंदर तनाव आदि समस्याएं नहीं होती हैं। और पति और पत्नी के रिश्ते काफी अधिक मजबूत रहते हैं। आप इस बात को समझ सकते हैं।
चौथी बात होने वाली संतान के लिए शुभ होता है।
दोस्तों यदि पहली होली यदि महिला अपने मायके के अंदर बिताती है। तो यह उसकी होने वाली संतान के लिए काफी अधिक शुभ होता है। इसलिए यदि आप भी चाहते हैं कि आपकी होने वाली संतान के साथ सब कुछ अच्छा ही अच्छा हो तो आप भी यह कर सकती हैं।
5 वीं बात अच्छा भाग्य आता है।
कुछ जगहो पर यह भी माना जाता है कि पहली होली को यदि पत्नी को मायके भेज दिया जाता है , तो इसकी वजह से अच्छा भाग्य आता है। और जीवन के अंदर बुरा समय दूर हो जाता है। जोकि अपने आप मे एक अच्छी बात है। और पत्नी यदि पहली होली पर घर मे रहती है , तो बुरा होने के चांस होते हैं।
प्रथा का अशुभ प्रभाव इलोजी और होलिका की प्रेम कहानी
दोस्तों होलिका की मौत भी इस प्रथा की वजह से हुई थी । ऐसा माना जाता है। इसके लिए हम आपको होलिका की प्रेम कहानी को सुनाते हैं।
पौराणिक काल में, मारवाड़ (राजस्थान) के एक राजकुमार थे— इलोजी। वे अपनी वीरता और सुंदर व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। इलोजी का प्रेम संबंध असुर राज हिरण्यकश्यप की बहन होलिका के साथ था। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे और उनका विवाह तय हो चुका था।
विवाह के लिए फाल्गुन पूर्णिमा का दिन निश्चित किया गया था। इलोजी अपनी बारात लेकर होलिका के द्वार पर पहुँचने ही वाले थे। लेकिन उधर, हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से क्रोधित था और उसने अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था) को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए।
इलोजी बड़े धूमधाम से बारात लेकर हिरण्यकश्यप के महल के द्वार पर पहुँचे। लेकिन जैसे ही वे द्वार पर आए, उन्हें उत्सव के संगीत के बजाय लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज़ सुनाई दी। उन्हें पता चला कि होलिका अग्नि में बैठ चुकी है।
वरदान के गलत इस्तेमाल या ईश्वर की इच्छा के कारण, होलिका उस अग्नि में जलकर राख हो गई, जबकि भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गए।
जब इलोजी अग्नि कुंड के पास पहुँचे, तो वहां केवल राख बची थी। अपनी होने वाली पत्नी के वियोग में इलोजी सुध-बुध खो बैठे। उन्होंने उसी राख को अपने शरीर पर मल लिया और विलाप करने लगे। कहा जाता है कि वे इतने दुखी हुए कि उन्होंने अपना पूरा जीवन कुंवारा रहकर बिताने का निर्णय लिया और एक लोक देवता बन गए।
पहली होली ससुराल मे मनाने के उपर अनुभव ।

दोस्तों यदि हम लोगों के अनुभवों के बारे मे बात करें , तो आपको बतादें कि आजकल के 70 फीसदी तक के लोग इस बात को मानते हैं कि पहली होली ससुराल के अंदर ही मनानी चाहिए । वहीं 30 से 40 फीसदी लोग इस मान्यता को पूरी कड़ाई के साथ मानते हैं। यदि हम अपनी बात करें तो हमारे यहां पर भी लोग यही मानते हैं कि पहली होली को ससुराल के अंदर नहीं मानाया जाना चाहिए । हालांकि आधुनिक लोगों के लिए होली बस एक त्यौहार है । भले ही इसको कहीं पर भी मनाया जाए , बस खुशी से मनाया जाना चाहिए ।
एक बहु के रूप मे आपको पहली होली अपने मायेके के अंदर मनानी चाहिए ?
दोस्तों कई महिलाओं ने यह अनुभव किया है , कि अक्सर जब वे पहली होली ससुराल के अंदर मनाती हैं , तो काफी समस्याएं आती हैं। एक तो उनको भारी कपड़ों को पहना दिया जाता है , और सब लोगों के पैर वैगरह छूने पड़ते हैं। कुल मिलाकर बहुओ से ही कुछ ना कुछ अच्छे की उम्मीद की जाती है। तो वे खुलकर होली का मजा नहीं उठा पाती हैं। इसके विपरित यदि वे मायेके के अंदर होती हैं , तो फिर वे खुल कर होली का मजा उठा सकती हैं । कुल मिलाकर यह एक तरह से बहुत ही अच्छी बात है।
पहली होली के बाद परिवार मे बुरा हुआ ।
सुनिता नामक एक महिला कमेंट के अंदर लिखती हैं। कि जब मेरी शादी हुई थी , तो पहली होली मैंने अपने ससुराल के अंदर ही मनाई थी। लेकिन बाद मे संयोगवंश परिवार का कोई सदस्य बीमार हो गया । और उसके बाद ससुराल वालों ने इस समस्या को पहली होली से जोड़ दिया तो ऐसा भी हो जाता है।
उत्तर भारत के कुछ समुदायों में मान्यता है कि सास और बहू को एक साथ होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। जिन महिलाओं ने इसे नजरअंदाज किया । अक्सर उन महिलाओं ने यह अनुभव किया कि उनकी सास के साथ छोटी मोटी बातों को लेकर काफी अधिक झगड़े शूरू हो गए ।
दोस्तों वैसे देखा जाए तो यह मान्यता है। और लोग अपने परिवार को हमेशा सुरक्षित देखना काफी अधिक पसंद करते हैं ।इसलिए वे अक्सर छोटे मोटे अपशकुन स छुटकारा पाने का प्रयास करने लग जाते हैं।

क्या आपको पहली होली ससुराल मे मनानी चाहिए ?
देखिए हर नई नवेली दुल्हन के मन मे यह सवाल जरूर आता है कि क्या पहली होली ससुराल मे मनाई जानी चाहिए या नहीं ? तो इसका उत्तर बहुत अधिक सिंपल है। यदि आपके ससुराल वाले इस परम्परा को मानते हैं , तो फिर आपको पहली होली ससुराल के अंदर नहीं मनानी चाहिए । और अपने मायेके के अंदर चले जाना चाहिए । वहीं यदि आपके ससुराल वाले थोड़े आधुनिक प्रवृति के इंसान हैं , और आपसे रिक्वेस्ट कर रहे हैं , तो फिर आपको इसके बारे मे सोचना चाहिए । और आप अपने ससुराल मे पहली होली मना सकती हैं।
रही बात अशुभ की , तो आमतौर पर यह उतना अधिक अशुभ नहीं है। इसके अंदर 50 फीसदी का आंकड़ा है। मतलब लगभग 70 फीसदी लोग इसको शुभ नहीं मानते हैं , तो आपको इससे डरने की जरूरत नहीं है। बाकि 30 फीसदी तो बुरा होना एक इतेफाक हो सकता है।
आपसे पहले आई बहुओं की स्थिति को देखें।
आपकी शादी अभी हुई है। मगर आपके ससुराल के अंदर पहले वाली बहुएं भी तो थी , आप देखें कि क्या पहली होली वे ससुराल के अंदर मनाई थी , या फिर नहीं मनाई थी , यदि उन्होंने पहली होली ससुराल के अंदर मनाई थी , तो आप भी मना सकती हैं। यह देखकर आपको एक तरह से यह अंदाजा हो जाएगा कि आपको क्या करना है। और क्या नहीं करना है। हर जगह की परम्परा अलग अलग होती है।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पहली होली की मान्यताएं
| क्षेत्र (Region) | मान्यता (Tradition) | क्या ससुराल में मनाना सही है? |
| उत्तर प्रदेश / बिहार | सास-बहू का साथ होलिका दहन देखना वर्जित माना जाता है। | नहीं (अक्सर मायके भेजा जाता है) |
| राजस्थान / मध्य प्रदेश | कुल की परंपरा और ‘शकुन’ को बहुत महत्व दिया जाता है। | नहीं (ज्यादातर परिवारों में वर्जित) |
| हरियाणा / पंजाब | देवर-भाभी और पूरे परिवार के साथ होली का हुड़दंग। | हाँ (बहुत शुभ और मस्ती भरा माना जाता है) |
| दिल्ली और महानगर | आधुनिक सोच, कोई विशेष रोक-टोक नहीं। | हाँ (सुविधा और छुट्टी के अनुसार) |
| उत्तराखंड (पहाड़ी क्षेत्र) | ‘बैठकी होली’ की परंपरा, परिवार का साथ जरूरी। | हाँ (परिवार के साथ मनाना पसंद करते हैं) |
| दक्षिण भारत | यहाँ होली का महत्व उत्तर भारत की तुलना में कम है। | हाँ (कोई विशेष पाबंदी नहीं है) |
यदि टेबल के अंदर हम देखें तो इससे पता चलता है कि यूपी और राजस्थान के अंदर पहली होली को ससुराल के अंदर मनाने के लिए मना किया जाता है। जबकि पंजाब के अंदर इसको काफी अधिक अच्छा माना जाता है।
कुछ लोग यह कहते हैं कि दो लक्ष्मी को एक साथ अग्नि के सामने खड़े नहीं होना चाहिए । यह सही नहीं होता है। और इसको अशुभ माना जाता है।
तो दोस्तों आपको हम इस लेख के अंदर पुरी बात बता चुके हैं , कि आप होली को किस तरह से मना सकते हैं ? आप किस तरह की मान्यताओं के उपर यकीन करते हैं। इसके लिए नीचे कमेंट करके आप हमें बता सकते हैं। हम आपके सवालों का जवाब देने का प्रयास करेंगे।
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