उदय का विलोम शब्द uday ka vilom shabd

‌‌‌उदय का विलोम शब्द बताएं, ‌‌‌उदय शब्द का विपरीतार्थक शब्द है, ‌‌‌उदय का उल्टा , uday ka vilom shabd

शब्द (word) विलोम (vilom)
‌‌‌उदय‌‌‌अस्त  
udayAst
        

‌‌‌उदय का विलोम शब्द और अर्थ

‌‌‌उदय का विलोम शब्द अस्त होता है।उदय का मतलब होता है प्रकट होना । जैसे सूरज उदय होता है चांद उदय होता है। इसी प्रकार से उदय को कई अर्थों मे प्रयोग लिया जाता है। इंसान के जीवन का सूर्य जब उदय होता है तो वह काफी खुश होता है या वह इस संसार मे आता है। उदय का मतलब सक्सेस होना भी होता है। कारण यह ‌‌‌है कि जब हम सक्सेस होते हैं तो उसके लिए भी हम यही कहते हैं कि आज हम उदय हुए हैं। वैसे उदय एक प्रकार सकारात्मक शब्द होता है। उदय होने का मतलब ही अच्छा होता है ।

उदय का विलोम शब्द

‌‌‌अक्सर जब सूर्य उदय होता है तो आपने देखा होगा कि कवि लिखते हैं कि खुशी का माहौल बन जाता है। पशु पक्षी इसी का इंतजार करते हैं। इसी प्रकार से इंसान भी सूर्य उदय का इंतजार करते हुए सोचते हैं कि कल सूर्य उदय होगा तो यह काम करेंगे वह करेंगे आदि ।

‌‌‌सूर्य का उदय होना एक सकारात्मक संकेत लेकर आता है।जब आप सूर्य के उदय होने के बाद उठते हैं तो आपके अंदर एक नई उर्जा का संचार होता है और आप फिर से अपने काम के अंदर लग जाते हैं। क्योंकि यह उदय एक तरह का नया सवैरा है जिसमे आपको अब नया कुछ करना है।

‌‌‌अस्त का मतलब और अर्थ

‌‌‌अस्त का मतलब होता है एक तरह से छिप जाना ।या फिर खत्म हो जाने को भी कई बार अस्त होना कहते हैं। इसी प्रकार से सूर्य के डूबने को भी अस्त होना कहते हैं। जैसे सूर्य शाम के वक्त डूब जाता है तो हम कहेंगे कि सूर्य अस्त हो रहा है।

‌‌‌सूर्य अस्त होना एक तरह से अच्छा शकुन नहीं होता है। कारण यह है कि अस्त होने को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। जैसे कोई इंसान मर रहा है तो उसके लिए यह कहा जाता है कि अब उसका सूर्य अस्त होने वाला है या वह अब मरने वाला है।

‌‌‌इस प्रकार से यदि कुछ समाप्त हो रहा है तो उसके लिए भी अस्त होना कहा जाता है। जो उदय होता है वह अस्त भी होता है। इस घरती पर जो कुछ भी मौजूद है वह उदय ही तो हुआ है और एक समय आएगा जब वह अस्त होगा या धीरे धीरे अस्त हो रहा है। परिवर्तन सदैव यहां पर जारी है।

‌‌‌उदय और अस्त की कहानी

‌‌‌प्राचीन काल की बात है एक गांव के अंदर दो भाई रहा करते थे । एक का नाम उदय था और दूसरे का नाम अस्त था। उदय और अस्त का स्वाभाव एक दम से विपरित था। उदय जहां पर भी जाता था। सब कुछ अच्छा करके आता था लेकिन अस्त जहां पर भी जाता । सब कुछ बरबाद ही करके आता था।

‌‌‌दोनों के विचार एक दूसरे से भिन्न होने की वजह से वे एक दूसरे के साथ कभी भी नहीं बैठ पाते थे । एक बार गांव के अंदर अकाल पड़ा तो उदय और अस्त ने शहर के अंदर गये । और एक राजदबार के अंदर जाकर बोले …….हे राजन आप हमे काम पर रखलें । हम बहुत भूखे हैं।

……..लेकिन आपको क्यों काम पर रखें ? आपको  ‌‌‌क्या आता है अपने टेलेंट के बारे मे बताओ राजा ने पूछा ।

……..मेरा नाम उदय है आप मुझे उस काम मे लगा सकते हो जिसको सुधारना है। मैं बेहतरीन काम करके दिखा सकता हूं ।

………ठीक है सामने बगीचा है इसके अंदर तुम क्या अच्छा कर सकते हो करके दिखाओ । 5 दिन बात आकर मिलना ।

‌‌‌…….राजन मेरा नाम अस्त है और आप मुझे कोई भी वह काम करवा सकते हो जो किसी को बरबाद कर सके । आप चाहे तो सैना में भेज सकते हो ।

——–‌‌‌ठीक है।कल पड़ोसी राजा ने युद्ध की चेतावनी दी है। पड़ोसी राजा को पराजित करने का कोई जबरदस्त आइडिया बताओ ।

……राजन सरल आइडिया यह है कि आप मधुमक्खी के झूंड को अपने साथ रखो और खुद को पूरी तरह से इस प्रकार से कपड़े से ढ़कों कि वे आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकें। और दुश्मन की सेना जैसे ही युद्ध ‌‌‌के लिए आएं मधुमक्खी को खुला छोड़दो ।ऐसा करने से दुश्मन सैना बौखला जाएगी और तब तक हम अपना काम करदेंगे । यह दुश्मन सेना को मात देने का बहुत ही सरल तरीका है।

——–‌‌‌राजा अस्त की बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुआ और बोला ………..ठीक है ।कल से तुम सेना मे लगना और दुश्मन की सेना का सूर्य अस्त कर देना ।

‌‌‌उधर जब 5 दिन बीत गए तो उदय राजा के पास आया और बोला ……महाराज मैंने सारे बगीचे को सही कर दिया है आप चाहें तो चलकर देख सकते हैं।

राजा उदय के साथ गया तो देखा कि बगीचा अब काफी सुंदर लग रहा है। बगीचे को काफी बेहतरीन ढंग से सजाया गया है। ऐसा कोई भी माली पहले नहीं कर पाया था।

———–‌‌‌हमे तुम्हारा काम पसंद आया आज से तुम यही काम करोगे ।और तुम्हारे भाई को तो हमने पहले ही चुन लिया है। अब तुम आराम से यहां पर रह सकते हो । तुमको यदि कोई समस्या हो तो हमे बताना ।

‌‌‌अस्त ने भी अपने बताए आइडिया के अनुसार दुश्मन सेना को परास्त कर दिया और दुश्मन सेना के ही भूभाग पर अपना कब्जा कर लिया । जिससे राजा बहुत अधिक प्रसन्न हुआ । और अस्त को राजा ने कई ईनाम भी दिये ।

‌‌‌इस प्रकार से यह कहानी आपको यही सीख देती है कि जो इंसान इंसान के गुणों के अनुसार उनको काम देने मे सक्षम होता है वही तो उनकी काबिलियत का फायदा उठा पाता है। लेकिन आज इंसान के गुण नहीं वरन कागज देखे जाते हैं। यदि आपके पास कागज है तो सब चलेगा ।

‌‌‌लेकिन दुनिया के अंदर आज भी बहुत सारे देश ऐसे हैं जो सेना और दूसरे कामों के लिए इंसान के गुणों का चुनाव करते हैं । यदि आप एक चूहे से डरने वाले इंसान को उसकी डिग्री को देखकर सेना मे भेजेंगे तो वह दुश्मनों को क्या खाक मारेगा । वह तो बंदूक की गोली से ही डर जाएगा ।‌‌‌प्राचीन काल मे वर्ण व्यवस्था गुणों की वजह से ही तो थी।

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