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123 हलवाई शायरी halwai shayari जलेबी जैसी लड़कियों को खुश करने के लिए

halwai shayari दोस्तों हलवाई वह होता है। जोकि मिठाई बनाने का काम करता है। आप शादी विवाह के अंदर हलवाई को अपने घर पर बुलाते ही हो । आपको यहां पर हम हलवाई से जुड़ी हुई । कुछ शायरी के बारे मे बता रहे हैं। उम्मीद करते हैं , कि आपको यह हमारा प्रयास काफी अधिक पसंद आने वाला है। हलवाई के मिठास पर कुछ फेमस शेयर आपको बता रहे हैं।

तू हलवाई बन जा ,

मैं मिठाई वाला ,

फिर किस्सा दुनिया

……

उसके घर के पास

हलवाई की दुकान थी ,

मुझको उससे प्यार हुआ

वो पहली इंसान थी ।

halwai shayari

……

एक छत के नीचे रहते थे ,

दोनों एक दूसरे से अनजान थे ,

एक हलवाई था और

दूसरा दंगाई था ।

……

हलवाई की दुकान पर बैठकर

कभी मिठाई खाया करते थे ,

उस वक्त चुपके चुपके

हमसे मिलने के लिए वो आया करते थे ।

…….

हलवाई की दुकान ,

और उसकी मुस्कान ,

दिल मे फिर से डाल

देते हैं जान ।

halwai ki shayari

…….

वह हलवाई की बेटी थी ,

मुस्कान उसकी कातिलाना ,

सामने हमारे नागिन की तरह लेटी थी ।

…….

एक था रामू हलवाई ,

एक था बेवफाई ,

दोनों के कर्म अलग अलग ,

यही तो है जिदंगी की दोराही ।

हलवाई शायरी

……

जिस हलवाई की दुकान पर

तू जाती थी ,

वह दुकान तो मुझे वर्षों बाद

तक याद आती थी ।

…….

तेरा हलवाई की दुकान पर

बैठकर मिठाई खाना ,

फिर सबको खिलखिलाकर

हंसाना ,

आज भी याद करता है यह

जमाना ।

हलवाई शायरी

…….

वह हलवाई कढ़ाई से

जलेबियां उतार रहा था ,

देखकर मेरे मुंह मे पानी

आ गया ,

मैं उसके करीब से जा रहा था ।

…….

रामू हलवाई का मिठास ,

तेरे प्यार का एहसास ,

सबको आ जाता है रास ।

…….

आजकल वह हलवाई बनी

फिर रही है ,

खुद के रिश्ते को बचा ना सकी ,

दूसरों की साई बनी फिर रही है।

……

हलवाई का बेटा हूं मिठास

घोलना अच्छे से आता है ,

हलवाई ही है ,

जो सबकी जिदंगी मे

मिठास को बुलाता है।

……

जिदंगी को तो हलवाई जैसी ,

अगर हसीना हो ,

तो अपने पड़ोसी की लुगाई जैसी ।

……

जिदंगी ​जीने का मजा ही

कुछ और हो जाता ,

अगर मेरे हलवाई होने का

जमाने मे शौर हो जाता ।

हलवाई स्टेटस

…….

दिल की हर घड़ी ​मीठी हो जाए ,

जमाना तो लात मारेगा ही ,

अगर बेहूदा अपनी स्वीटी हो जाए ।

……..

हलवाई का हलवा ,

और तेरा जलवा ,

कसम से मस्त बहुत लगते हैं ।

…….

वह शादी ही क्या ,

जिसमे हलवाई ना हो ,

वह इश्क ही क्या ,

जिसमे लड़ाई ना हो ।

……..

वह दोस्ती ही क्या ,

जिसमे बवाल ना हो ,

वह हलवाई ही क्या ,

जो खुद एक सवाल ना हो ।

halwai ki shayari हिंदी मे

……

खेतों मे हल चलाकर किसान बन गए ,

जब बनाई तूने बेवफा वाली मिठाई ,

तो दिल पर सदा के लिए निशान बन गए ।

……..

जिदंगी की हर समस्या का

हल नहीं होता ,

हलवाई के पास अपनी मिठाई का

कोई कल नहीं होता ।

…….

हमने तो सिर्फ तेल गर्म करना

सीखा था  ,

और दुनिया हमें हलवाई कहने लगी ।

halwai ki shayari

……

कारिगर हूं मैं मिठाई का ,

क्योंकि बेटा हूं मैं हलवाई का ।

………

देखने मे वो चिकनी कढ़ाई सी है ,

मगर स्वाद मे वो मिठाई हलवाई सी है।

…….

हौले हौले करीब आती है ,

बनकर हलवाई दिल लगाती है।

……..

तेरे घर के उपर हलवाई की दुकान हो ,

पास तेरे श्मशान हो ,

तो बता कोई कहां जाएगा ,

दिल जिसका विरान हो ।

……..

हलवाई की मिठाई मे ,

तेरी तन्हाई मे ,

खूशबू तो बहुत होती है यारा ,

इस लड़ाई मे ।

halwai ki shayari

………

हलवाई का बनाया हुआ ,

तेरा सताया हुआ ,

कोई बिगाड़ नहीं सकता ।

……

लड़के बिगड़ गए

पड़ोसन की मिठाई खाकर ,

हम भी दिल हार बैठे ,

तेरे दर पर आकर ।

……

खूबसूरती मे तो तू लाजवाब है ,

सुन बे हलवाइन तेरे हाथ की

मिठाई खाने का ख्वाब है।

……..

दिल के अरमान किसी के पूरे नहीं होते ,

बिना हलवाई के शादी विवाह अधूरे नहीं होते ।

…….

तू है मिठाई का कारिगर ,

वो है प्यार की बाजिगर ,

दोनों यारो करलो सब्र ।

halwai ki shayari

……

ज़िंदगी मीठी तो है, बस इसे महकाने का हुनर चाहिए।

तेरी खुबसूरती को बढ़ाने के लिए ,

बस एक चुनर चाहिए ।

…..

स्वाद है उसका मिठाई जैसा ,

मगर अंदाज है साली का कसाई जैसा ।

……..

आजकल वह हलवाई की दुकान पर

तेल गर्म करती है ,

बांट कर मिठाई अपने आशिकों को ,

अनोखा धर्म करती है।

……

बोलती है मेरे हाथ की अगर मिठाई खानी है ,

तो घर आ जाना ,

लगता है साली हद से ज्यादा सयानी है।

……

हाथों में मलाई की कड़ाही, दिल में प्यार की आग,

ये हलवाई नहीं, ज़िंदगी के मीठे रंगों का राज है।

हलवाई शायरी

……

हलवाई की दुकान पर हर शाम सजती है ,

मिलते हैं आशिक पुराने ,

और मंदिर की घंटी बाजती है।

……..

हर शे’र में वो मिठास हो, हलवाई के हाथ सी

जो पढ़ते ही मुस्कुरा दे, ज़ुबां पर आ जाए ,

खुशी की बारात सी ।

……

हलवाई के हाथों का मिठास ,

और तेरे प्यार का एहसास ,

हम कभी भूल नहीं सकते ।

…….

वो आजकल मावे से कलाकारी करती है ,

बनाती है इतने स्वाद पेड़े की

दुनिया उसकी जय जयकारी करती है।

……..

मैं मर जाउं तेरे हाथों के स्वाद पर ,

हलवाई बनकर आजा मेरे नांद पर ।

……..

हलवाई का घर  मेरे करीब था ,

बोलती है इतना मिठास कहां से लाए ,

हम बोले यह तो अपना नसीब था ।

हलवाई शायरी

…….

हलवाई मैं बन ना सका ,

बाती बनकर कभी जल ना सका ,

कैसे रहती वो मेरे पास ,

कदम से कदम मिलाकर मैं

उसके साथ चल ना सका ।

…….

होठों से लगी हो जलेबी ,

बैंठें हो हलवाई की दुकान पर ,

खा जाएंगे पूरा , भले ही

आ जाए गरीबी ।

……

हलवाई की दुकान पर

तेरा और मेरा मिलना होता था ,

दिल्लगी हो गई दोनों की ,

यह जो सिलसिला होता था ।

हलवाई स्टेटस

…….

हलवाई की दुकान मे वो

मिठाई बेच रही है।

मिठाई कम खुद की फोटो

अधिक खेंच रही है।

…..

जलेबी का सिरप ढलका, गुलाबजामुन की मिठास

हलवाई ने बनाई है जिंदगी की हर उदासी उल्लास ।

…….

जिदंगी मे छाई उदासी सी ,

मिठाई की दुकान मे बैठी है तू ,

फिर भी क्यों लगती है बासी सी ।

……..

​हलवाई ने कहा है ,

अगर मिठाई बनाना सीखना है ,

तो आ जाना दुकान पर ,

स्वाद ऐसा है मेरी मिठाई का ,

कि कब्जा हो जाएगा जमीं

और आसमान पर ।

हलवाई स्टेटस

…….

जब उस हलवाई ने तोड़ा दिल मेरा ,

उसी वक्त खत्म हो गया था साहिल मेरा ।

…..

आजकल वह हलवाई से नैन लड़ा रही है ,

बैठकर हलवाई की दुकान पर ,

जलेबी से इश्क फरमा रही है।

……

जलेबी जैसा तेरा स्वाद है ,

एक बार जिसने चख लिया

स्वाद तेरा मां कसम बरबाद है।

……

हलवाई के घर मे मेरा आना जाना था ,

उस हलवाई का बेटा मेरा दिवाना था ।

……..

दिल की हस्ती कोई मिटा नहीं पाया ,

दोस्ती हलवाई की और मेरी ,

कोई छुटा नहीं पाया ।

……

अक्सर उनके फोन बीजी आते हैं ,

जिनको हलवाई पसंद आते हैं।

…..

हलवाई तेरी मिठाई का दुनिया

मे हल्ला है ,

एक तू है और एक अपना

नल्ला है।

हलवाई स्टेटस

……

जिदंगी के झरोके से ,

वह अक्सर झांकती है ,

तेरी दुकान से मिठाई क्या खाई ,

हर वक्त मिठाई को ताकती है।

……

हलवाई मे अगर दम हो ,

तो भला मिठाई कैसे कम हो ।

……..

मेरी दोस्ती ने हलवाई

को माला माल कर दिया ,

दोस्ती हो तो ऐसी ,

जिसने हर जगह मिठाई

के नाम पर बवाल कर दिया ।

……..

हलवाई की दुकान पे आके,

सबकी हालत ख़राब हो गई,

जलेबी की लत लग गई,

रबड़ी का शौक़ बढ़ गया ,

जब मैं लेने पहुंचा तो

सब कुछ बंट गया ।

…….

मिठाई खिलाओगे ,

तो मीठा बोलेंगे ,

अगर खट्टाई खिलाओगे ,

तो खट्टा बोलेंगे ।

…….

मैं हलवाई हूं अपने घर की ,

कहती हूं खाकर कसम

तेरे सर की ।

…….

मेरी जलेबी का स्वाद भी

कभी चख लिया कर ,

अगर कोई हसीन लड़की

रहना चाहती है तेरे संग ,

तो रख लिया कर ।

……..

जिसे शौक को मीठाई का ,

वह तो हाथ तो थामेगी ही

हलवाई का ।

…….

तुम्हारी याद का हलवा इतना मीठा है,

की हलवाई की दुकान भी शर्मा जाए।

तुम्हारे इश्क़ की जलेबी में उलझा हूँ मैं,

देखकर तेरी मस्त जवानी हर कोई

भ्रमा जाए ।

……

तेरे होंठों की मिठास तो हलवाई को मात देती है,

जिदंगी आसमां पर पहुंच जाती है ,

जब तू साथ देती है।

…….

हलवाई का मिठास कमाल का है ,

होंठों का रस तेरा गुलाल का है ,

हाए मर जाएं तेरी इक अदा पर ,

आजकल जमाना सारा ,

तेरे जैसे माल का है।

……

तेरे होठों का मिठास कभी जाता नहीं ,

हलवाई को भी ऐसी मिठाई बनाना आता नहीं ।

…….

वो सवाल मत कर ,

जिसका कोई जवाब ना हो ,

वो हाल मतकर जिससे

हलवाई की मिठाई खराब ना हो ।

……

एक तरफ तू हो ,

और एक तरफ हलवाई की मिठाई ,

सब तुझे ही चाहेंगे ।

…….

हलवाई की मिठाई को खाने

का जी करता है ,

धीरे धीरे ही सही ,

तेरी बांहों मे आने का जी करता है।

…….

जिदंगी मे अगर कोई हलवाई ना हो ,

जिदंगी मे अगर कोई लड़ाई ना हो ,

मस्त चलेगी जिदंगी अगर उसमे

कोई रूसवाई ना हो ।

…….

एक बाग जिसमे झूला है ,

कैसे आएगा वो ,

जो तेरा रस्ता भूला है ,

जी करता है हलवाई बन जाउं

क्योंकि तेरे घर मे उसी का चुल्हा है।

…….

जिदंगी हलवा होती जा रही ,

और तू फिर कभी काला

कलवा होती जा रही ।

……..

दौर है नए नए हलवाइयों का ,

रिश्ता है तेरे से आजकल हवाइयों का ।

…….

वो आजकल पिश्ता और

बादाम खाती है ,

वेट कम करने के चक्कर मे

हलवाई की मिठाई से

दूरी बनाती है।

……

हलवाई की दुकान ,

नीचे फीके पकवान ,

देखकर तौबा कर जाए मेहमान ।

……

समंदर मे गिर कर ,

हद से ज्यादा निखरकर

कभी हलवाई की मिठाई थे हम ,

पहुंचे उसके घर बिखर कर ।

…….

हलवाई ने जिदंगी को ,

मीठा बनाया था ,

दुश्मन से दोस्त बन गया ,

जिसने मीठा खाया था ।

……..

दिल मे चाहत तेरी ,

कैसे ना आहत हो भावना मेरी ,

हलवाई की मिठाई से दूर होगी ,

कड़वाहट तेरी ।

……

सुनसान जमाना है ,

दिल इसे लगाना है ,

हलवाई की मिठाई ,

से बढ़कर मकसद ,

हमारा उसे पाना है।

………

जहां हलवाई का ठिकाना होता है ,

वहां पर अपना यार भी बेगाना होता है।

……..

जिदंगी मे तेरी चाहत कभी पूरी नहीं होती ,

अगर तू साथ है ,

तो हलवाई की मिठाई उतनी जरूरी नहीं होती ।

……..

सुंदर दिलवाली मेरे वाली है ,

आजकल मिठाई भी कई चेहरे वाली है ,

कैसे आजाद हो जाएं इस जिदंगी से ,

जिदंगी भी साली गोल घेरे वाली है।

……..

हलवाई की मिठाई का रंग लाल ,

तेरे होंठों का स्वाद बड़ा कमाल ,

जंहा भी जाए तू करती है बवाल ।

……..

तेरा इश्क और कुछ नहीं ,

बस एक माया जाल है ,

एक बेकार हलवाई की तरह

खराब जलेबी की उपरी खाल है।

…….

हलवाई अगर अनाड़ी हो ,

तो फिर कैसे उसकी मिठाई

खिलाड़ी हो ।

……..

जिदंगी मे सकून नाम की चीज नहीं ,

बिना हलवाई के मिठाई भी लजीज नहीं ।

…….

जिस दिन अच्छाई का इंतकाल हो जाए ,

उस दिन हलवाई का भी बुरा हाल हो जाए ।

……..

​हलवाई की दुकान पर

बैठकर पीते हैं जो सिंगार ,

कसम से लगते हैं बहुत बेकार ।

……

हवा मे मिठाई लेकर उड़ता गुब्बारा ,

उसको देखकर जीभ लपका रहा है

यह बेचारा ।

…….

मिठाई वालों को होश कहां ,

बीवी भागेगी नहीं तो क्या करेगी ,

नए नए लौंड़ों मे उतना जोश कहां ।

……

हलवाई का बना मीठा मत खाया करो ,

जवानी बरबाद करने के लिए ,

सपने मे मत आया करो ।

…….

गाल गुलाबी ,

जमाना शराबी ,

मिठाई वाले से दिल लगाती है तू ,

हम मे है क्या खराबी ।

……

हलवाई की बनाई पानी पूरी ,

उसे हैं वो हम से ज्यादा जरूरी ।

…….

आजकल वह हलवाई के पास

छोले भटूरे खा रही है ,

आस पास को परवाने

बना रही है।

…..

तेरी शायरी ने शायर बना दिया ,

आजकल वह हलवाई बनी फिर रही है ,

उसकी मिठाई ने मुझे और ज्यादा घायल बना दिया ।

……

मैं हलवाई हूं तेरी गली का ,

एक अंदर का दाना हूं

तेरी फली का ।

……..

बेवजह शक मत किया कर ,

बनकर हलवाई मिठाई की दुकान पर

बरबाद वक्त मत किया कर ।

……..

लोग मिठाई से ज्यादा तो

तुझे देखने दुकान पर आते हैं।

………

तेरे जैसे परवाने हर मुकाम पर आते हैं ,

अक्सर वो मिठाई खाने हमारी

हलवाई की दुकान पर आते हैं।

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