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नमक हरामी लोगों पर 133  शायरी दिल की भड़ास को व्यक्त करने के लिए

namak haram par shayari,namak haram logon ke liye shayari के बारे मे हम आपको यहां पर बता रहे हैं। अक्सर नमक हराम वो लोग होते हैं , जोकि आपको धोखा देने का काम करते हैं। इन लोगों के उपर आप बहुत अधिक विश्वास करते हैं। लेकिन यह लोग आपके विश्वास को कायम नहीं रख पाते हैं। और आपके विश्वास को तोड़ देते हैं। ऐसे लोगों पर कुछ शायरी हम आपको यहां पर बता रहे हैं।

दिल ना लगाना कभी नमक हरामी से ,

गला मत काट देना किसी का बेईमानी से ।

……..

कुछ लोग नमक हराम होते हैं ,

कुछ लोग फ्री मे बदनाम होते हैं ,

अच्छे लोग रोड़ पर नहीं मिलते ,

उनको अक्सर बहुत काम होते हैं।

namak haram shayari in hindi

……..

नमक का कर्ज जो चुकाए ,

वो नमक हराम नहीं ,

वफादार कहलाए ।

…….

कुछ लोगों के खून मे

नमक हरामी होती है ,

कुछ लोगों के जन्म मे

शैतानी होती है।

…….

जिस थाली मे हम खाते हैं ,

उसमे हम छेद नहीं करते ,

दोस्त और दोस्त मे हम

कभी भेद नहीं करते ।

…….

नमक हराम अक्सर दगा देते हैं ,

आपकी वफादारी की आपको ही सजा देते हैं।

namak haram par shayari,

…..

खून पसीना जिस पर लगाया था ,

वही नमक हराम हमें मारने आया था ।

……

नमक हरामी बहुत हैं यहां पर ,

नजर रखना मेरे यार सारे जंहा पर ।

……

सामने से प्यार दिखाते हैं ,

मौका मिलते ही ,

अपना असली रंग पर आते हैं।

namak haram logon ke liye shayari

……

वो नमक हराम मिले थे ज़िन्दगी के सफ़र में,

अकेले मरने के लिए छोड़ गए इस डगर मे ।

………

वो नमक हराम हमारी कामयाबी को पचा नहीं पाए ,

हम उनके इरादे समझ गए ,

वो कुछ हमारा बिखरा नहीं पाए ।

……

मारने का इरादा रखते हैं वो ,

सामने से प्यार और पीठ पीछे

दुश्मनी का वादा रखते हैं वो ।

namak haram logon ke liye shayari

……

जिसने चख लिया हमारे नमक का स्वाद ,

वो नमक हरामी नहीं कर सकता हमारे साथ ।

…….

खून कर दिया उसने हमारी वफादारी का ,

नमक खाकर हमारा ,

नाम बदनाम कर दिया सारी बिरादरी का ।

……

ज़हर दे गए वो, जिन्हें हम रोटी कहते थे,

नमक हरामी की इंतहा हो गई देखो।

वही आज हमें मारने चली ,

जिसे हम अपनी चोटी कहते थे ।

namak haram shayari

……

हमने समझा था नमक हलाल है कोई,

हो गया इतना सितम ये कमाल है कोई

जिस डाल पर बैठे थे, वही डाल काट गया,

ये तो हमसे भी बड़ा नमक हराम निकला।

लगता है हमसे भी विशाल है कोई ।

……

उनके वादे पे भरोसा था, ये ग़लतफहमी थी,

जिन्हें अपना समझा था, वही नमक हराम निकले।

जिनको ईमानदार समझते थे वो ही बेईमान निकले ।

…….

देखो सब तरफ

नमक हरामों की फौज खड़ी है ,

बेईमानी करके फिर से नाता

जोड़ने के लिए वो रस्ते मे रोज खड़ी है।

namak haram shayari

…….

मरते दम तक तेरी नमक

हरामी भूलेंगे नहीं ,

तू कितना भी चाहेगी ,

फिर भी तेरे लिए कुछ

बोलेंगे नहीं ।

……

सितम पर सितम किये जा ,

नमक हरामी करके ,

खुद मस्ती से जीये जा ।

……..

हमने खाया था नमक एक थाली का,

मगर आज पता ही नहीं चल रहा उस डाली का ।

…….

“रहते थे दिल में कभी जिनके नाम से घबराके,

आज उन्हीं का नाम लेते हैं हम सिर उठाके।”

namak haram shayari in hindi

…….

सुनबे नमक हरामी ,

मत कर यूं हमारी बदनामी ।

…….

मेरे मरने पर चुपके से जश्न मनाएंगे ,

मेरे जनाजे मे नमक हरामी ,

झूठा रोकर दिखाएंगे ।

…….

दोस्ती का दावा करते थे, मगर वक्त आया तो साथ छोड़ गए,

यह नमक हरामों  ने दिल के रिश्ते सारे तोड़ गए

……

कुछ घाव लाइलाज होते हैं ,

कुछ दोस्त दगाबाज होते हैं ,

मगर जो भी होते हैं ,

अक्सर खराब होते हैं।

……

हर घर मे एक नमक हराम होता है ,

अपनों को धोखा देना उसका काम होता है।

namak haram logon ke liye shayari

…….

दिल मत लगाना कभी नमक हरामों से ,

दूर ही रहना यार इन बेईमानों से ।

……

दिल तूने मे मेरा तोड़ दिया ,

नमक हरामी करके अकेले मुझे छोड़ दिया ।

……

नमक हरामी की हद देखो ,

दोस्तों को देखा देने की इनकी हिम्मत देखो ।

……

दूध का जला छाछ को

छान छान कर पीता है ,

धोखा मिलने के बाद यार

तो अकेला मस्ती से जीता है।

…..

नमक हरामों ने छल किया ,

मेरा खून का उन्होंने जल पिया ।

……

नमक हरामी उसके खून मे थी ,

दुश्मनी उसके जनून मे थी ।

namak haram logon ke liye shayari

…….

नमक हरामी हम करते नहीं ,

सामने से जो वार करे ,

उससे कभी हम डरते नहीं ।

……

नमक हरामों ने पूरा शहर जला डाला ,

खुद को भी नहीं बचा पाए ,

मगर गम का मौसम बना डाला ।

…..

नमक हराम का सैलाब है यहां ,

दोस्ती मे दुश्मनी का खिताब है यहां ।

…..

मुझे नहीं पता था ,

दोस्त ही दगा दे जाएंगे ,

संभल कर रहना ,

 हराम साले जान

ले जाएंगे ।

……

नमक हराम दोस्त होने से

दुश्मन होना अच्छा है।

namak haram logon ke liye shayari

…….

वह थोड़ी नमकीन थी ,

मगर बाहर से साली हसीन थी ,

मगर हमें क्या पता नमक

हरामी मे वह सबसे बड़ी क्वीन थी ।

…….

पीठ पीछे वो वार करेंगे ,

करके नमक हरामी आपकी

मौत का सामान तैयार करेंगे ।

……

दिल की दुनिया उसने बरबाद कर डाली ,

करके नमक हरामी दुश्मनी आबाद कर डाली ।

…….

आसमां से बादल भी कभी

कभी फट जाते हैं ,

नमक हराम दोस्त भी

कभी कभी रस्ते से हट जाते हैं।

…….

दुनिया वाले देखते रह जाएंगे ,

नमक हराम दोस्त पास फेंकते रह जाएंगे ।

……

दुश्मनी कोई हम से कर नहीं सकता ,

और जो नमक हरामी करे ,

उसे यार बख्स नहीं सकता ।

…….

नमक हरामी

और झूठी बदनामी ,

हम बर्दाश्त नहीं करते ।

…….

दिल को जला डाला उसने ,

नमक हरामी करके ,

अपनों को ही सुला डाला उसने ।

…….

दुश्मनों के साथ बैठकर शराब पीते हैं ,

नमक हरामी साले ,

अंत मे अकेले जीते हैं।

……

शेर को किसी के साथ की जरूरत नहीं ,

नमक हरामी की मौत का कोई मर्हूत नहीं ।

……

वह आंखों से ईशारे करती थी ,

नमक हरामी करके ,

अक्सर आशिकों को किनारे करती थी ।

…….

देती थी मीठा जहर ,

फिर बरपाती थी ,

नमक हरामी का कहर ।

…….

जिस दिन आएगी सुनामी ,

उस दिन खत्म हो जाएगी ,

इस दुनिया से नमक हरामी

जैसी बेईमानी ।

……

नमक हरामों को जवाब वक्त देगा ,

जो बच जाएंगे ,

उनको जवाब अपना रक्त देगा ।

……

मेरी चिता को जलाकर

वो हंस रहे थे ,

आज फिर वो नमक हरामों

से दोस्ती करके फंस रहे थे ।

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तेरा नमक तो खाया था, दिल से लगाया था,

पर तूने तो ज़हर का घूंट हमें पिलाया था।

वादा था दोस्ती का, ये तूने तोड़ दिया,

अपनी चाल मे तुमने हमें फंसाया था ।

…….

नमक हरामी की है ये दुनिया सारी,

मुस्कुराते चेहरे पे छुपी हैं ये ख़ारी।

काम निकल गया तो हो गए बेगाने,

फिर सब भूल जाते हैं अपनी जिम्मेदारी ।

….

वक्त ने सिखाया है एक सबक़ ये हमें,

नमक हराम से बचकर रहना है अब हमें।

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वक्त के साथ दोस्त यार भी बदल जाते हैं ,

हर जगहों पर नमक हरामों के पैतरे चल जाते हैं।

…….

मेरी वफाएं तुझे याद आएंगी ,

मेरी याद तुझे जरूर आएगी ,

जब दुश्मनी तेरी साथ आएंगी ।

……

नमक हराम नहीं समझ पाएंगे

कभी दोस्ती की खूशबू ,

किचड़ मे अक्सर आती रहती है बदबू ।

…..

नमक हराम दोस्तों का अंजाम एक ही होता,

दुनिया की नज़रों में हमेशा के लिए खोता।

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दोस्ती की नींव में तूने रखा था पत्थर,

नमक हरामी करके तोड़ डाला तूने वो छत्र।

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तू मेरा नमक हरामी दोस्त है ,

तेरे लिए अपने पराये सब एक गोश्त है।

…….

जिस दिन तेरे दिल पर चोट लगेगी ,

उस दिन तुझे नमक हरामी की सजा मिलेगी ।

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नमक हराम दोस्ती की नहीं होती कोई कीमत,

ऐसे लोगों की नहीं करनी चाहिए कोई खिदमत ।

……

याद है वो वादे तेरे दोस्ती के,

आज हर वादा तुझ पर हँसता है।

सच्ची दोस्ती की चाहत मे ही

इंसान नमक हरामी के चक्कर मे फंसता है।

……..

कभी अपना भी घर था ,

आज बेघर हो गए ,

आज हम नमक हराम

उनको सब कुछ देकर हो गए ।

……

दोस्त बनकर तूने जो जख्म दिए हैं,

उन्हें देखकर अब दुनिया भी शर्माएगी।

नमक हराम दोस्तों की ये दुकान बंद होगी,

एक न एक दिन तेरी पोल भी ज़रूर खुलजाएगी ।

……

ना दोस्तों से गिला करेंगे ,

ना दुश्मनों से मिला करेंगे ,

सच्चे दोस्ती के फूल कभी

ना नमक हरामी के बीच खिला करेंगे ।

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नमक का स्वाद कड़वा होता है ,

मगर जो नमक हरामी करे ,

वो साला भड़वा होता है।

……..

नमक हरामी की नहीं चलती कभी दुकान,

खुद ही डूबेगा तेरा ये झूठा अभिमान।

……

दोस्ती का दावा करता था तू जो रोज़,

वही दोस्त बन गया मेरा सबसे बड़ा दोष।

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नमक हरामियों ने दोस्ती के बेड़ा गर्क किया ,

बरबाद करके हमें हमारी जिदंगी को नर्क किया ।

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नमक हरामी यहां है लोग सारे ,

देखना कभी अपने मन से इनके नजारे ।

……

मीठा पानी बोलकर

,खारा पानी देते हैं ,

नमक हरामी लोग अक्सर ,

थोड़ी थोड़ी बोलकर ,

दाना पानी देते हैं।

…….

वो धीरे धीरे तेरे मन मे

जहर भर देंगे ,

करके नमक हरामी ,

तुझपर कहर कर देंगे ।

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……

दुश्मनी वो सामने से करेंगे नहीं ,

पीठ पीछे वार करने से कभी डरेंगे नहीं ।

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नमक हरामी करके तूने सोचा क्या पाया?

खो दिया एक सच्चा दोस्त और इज्ज़त और

सब कुछ गवाया ।

…..

तोड़ा जब तूने वफा का दामन ,

जिदंगी मन गई फिर तेरी वामन ।

……

समझा था तुझे हाथों का तारा,

तू निकला सबसे बड़ा हरामी और गद्दार हमारा ।

……

वक्त की मार से बच नहीं पाओगे,

नमक हरामो का यही होता है

सच को कभी पचा नहीं पाओगे ।

……

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